DHURANDHAR 2 REVIEW: पहले पार्ट की जबरदस्त सफलता के बाद ‘धुरंधर: द रिवेंज’ को लेकर दर्शकों में अलग ही उत्साह था। उम्मीद थी कि इस बार कहानी और भी ज्यादा तीखी, एक्शन और भी ज्यादा दमदार और ट्विस्ट पहले से बड़े होंगे। लेकिन क्या यह फिल्म उन उम्मीदों पर खरी उतरती है? जवाब थोड़ा मिला-जुला है।
फिल्म रिलीज से पहले ही जबरदस्त चर्चा में थी, लेकिन कई शहरों में प्रीव्यू शो कैंसिल होने से फैंस को निराशा झेलनी पड़ी। जिन दर्शकों को फिल्म देखने का मौका मिला, उनके अनुभव भी पूरी तरह एक जैसे नहीं रहे।
फिल्म का ओवरऑल अनुभव
करीब चार घंटे लंबी इस फिल्म में एंटरटेनमेंट है, लेकिन लगातार नहीं। कुछ हिस्से बेहद दिलचस्प हैं, खासकर शुरुआत और क्लाइमैक्स, मगर बीच का हिस्सा कई जगह खिंचता हुआ महसूस होता है।
जहां पहले पार्ट में रहमान डकैत का करिश्मा छाया हुआ था, वहीं इस बार वो प्रभाव थोड़ा कम महसूस होता है। नए किरदार आते हैं, लेकिन उनकी छाप उतनी गहरी नहीं बन पाती।
कहानी में क्या है खास?
कहानी को छह हिस्सों में बांटा गया है। जसकीरत सिंह रांगी (Ranveer Singh) के अतीत से शुरू होकर फिल्म उसके बदले की यात्रा दिखाती है।
एक साधारण परिवार से निकलकर हालात के चलते अपराध की राह पर जाने वाला जसकीरत, बाद में देश के लिए काम करने वाला एजेंट बन जाता है। पाकिस्तान में उसकी पहचान बदलकर हमजा अली मजारी बनती है।
पहले पार्ट की कहानी के बाद, यह फिल्म रहमान डकैत की मौत के बाद की घटनाओं को आगे बढ़ाती है। सत्ता, बदला और छिपे हुए दुश्मनों की इस कहानी में कई राजनीतिक और अंडरवर्ल्ड कनेक्शन जोड़े गए हैं।
अभिनय: फिल्म की सबसे बड़ी ताकत
पूरी फिल्म में Ranveer Singh का दबदबा साफ नजर आता है। उनका हर सीन मजबूत है- चाहे वो एक्शन हो, इमोशन हो या गुस्सा।
R. Madhavan का रोल सीमित होने के बावजूद असरदार है। जब-जब वो स्क्रीन पर आते हैं, फिल्म संभल जाती है।
Arjun Rampal को इस बार ज्यादा स्क्रीन टाइम मिला है, लेकिन उनके किरदार में वो खौफ या गहराई नहीं दिखती जो पहले पार्ट में थी।
Sanjay Dutt का रोल छोटा है, जबकि Rakesh Bedi क्लाइमैक्स में सरप्राइज एलिमेंट बनकर उभरते हैं।
निर्देशन: मेहनत दिखती है, लेकिन कसावट कम
निर्देशक Aditya Dhar ने रिसर्च और डिटेलिंग में कोई कमी नहीं छोड़ी। फिल्म में नोटबंदी, अंडरवर्ल्ड और राजनीतिक संदर्भों को जोड़ने की कोशिश दिलचस्प है।
लेकिन जहां पहले पार्ट में कहानी कसी हुई थी और हर कुछ देर में नया सरप्राइज मिलता था, वहीं इस बार कहानी थोड़ी ढीली लगती है। कई सीन पहले से अंदाजा लग जाते हैं, जो थ्रिल कम कर देता है।
संगीत: इस बार कमजोर कड़ी
फिल्म का म्यूजिक पहले पार्ट जितना यादगार नहीं है। एक-दो गाने ठीक हैं, लेकिन कोई भी ट्रैक लंबे समय तक याद नहीं रहता। एक रोमांटिक गाना तो कहानी में जबरदस्ती जोड़ा हुआ लगता है।
देखें या छोड़ें?
अगर आपने पहला पार्ट पसंद किया था, तो यह फिल्म जरूर देख सकते हैं। लेकिन इस बार उम्मीदें थोड़ी कम रखें। यह फिल्म पूरी तरह निराश नहीं करती, लेकिन पहले पार्ट जैसा जादू भी नहीं दोहरा पाती।
‘धुरंधर: द रिवेंज’ एक ऐसी फिल्म है जो बड़े स्केल, दमदार अभिनय और मजबूत शुरुआत के बावजूद अपनी पूरी क्षमता तक नहीं पहुंच पाती। यह अच्छी है, लेकिन यादगार बनने से थोड़ा पीछे रह जाती है

