हिन्दू यात्रा: बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने हाल ही में हिंदू राष्ट्र रैली के दौरान हुई धक्का-मुक्की की घटना को लेकर ब्रज के संतों और उपस्थित श्रद्धालुओं से माफी मांगी है।
भीड़ बढ़ने की वजह से कुछ लोगों को असुविधा हुई, जिसके बाद शास्त्री ने स्वयं आगे बढ़कर विनम्रता से कहा कि यदि किसी को भी कोई तकलीफ पहुँची है, तो वह इसके लिए क्षमा चाहते हैं।
हिन्दू यात्रा: रैली में क्या हुआ?
हिन्दू यात्रा: हिंदू राष्ट्र की प्रक्रिया और जनजागरण के लिए निकाली जा रही यात्रा में बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए। भीड़ बढ़ने के कारण कुछ स्थानों पर धक्का-मुक्की की स्थितियाँ बनीं। इससे कुछ श्रद्धालुओं, संतों या स्थानीय लोगों को असुविधा हुई होगी — जिसकी ज़िम्मेदारी लेते हुए शास्त्री ने सार्वजनिक रूप से माफी व्यक्त की है।
शास्त्री की माफी: क्या कहा उन्होंने?
हिन्दू यात्रा: पंडित धीरेंद्र शास्त्री का बयान बेहद विनम्र और संतुलित रहा। उन्होंने कहाँ
“हमारी रैली में यदि किसी भी व्यक्ति को धक्का-मुक्की या भीड़ की वजह से कोई तकलीफ हुई है, तो हम सब की ओर से मैं हाथ जोड़कर क्षमा माँगता हूँ।”
उन्होंने आगे यह भी कहा कि—
रैली का उद्देश्य केवल सनातन धर्म और हिंदू एकता का संदेश देना था।
किसी को भी कष्ट पहुँचाना उनका इरादा कभी नहीं रहा।
संतों, भक्तों और ब्रजवासियों का सम्मान उनके लिए सर्वोपरि है।
उनकी इस माफी ने माहौल को शांत किया और रैली को लेकर फैल रही गलतफहमियों को समाप्त किया।
संत समुदाय और भक्तों के लिए संदेश
धीरेंद्र शास्त्री ने साफ कहा कि वह हमेशा संत समाज और ब्रज संस्कृति के सम्मान को सर्वोच्च स्थान देते हैं। उन्होंने अपील की कि—
किसी भी यात्रा में भीड़ का बढ़ना स्वाभाविक है,
लेकिन यदि यात्रा के कारण किसी को असुविधा हुई है, तो संत समाज की तरफ से क्षमा मांगना हमारा कर्तव्य है।
यह बयान उनके विनम्र स्वभाव और सामाजिक जिम्मेदारी को दर्शाता है।
हिन्दू यात्रा: इस घटना का प्रभाव
शास्त्री का माफीनामा सोशल मीडिया और संत समाज में सकारात्मक रूप से लिया गया।
इससे यह संदेश गया कि धार्मिक नेतृत्व का मतलब केवल परंपरा निभाना नहीं, बल्कि जनता की तकलीफों को समझना भी है।
रैली को लेकर उठी आलोचनाएँ शांत हुईं और यात्रा का उद्देश्य—“हिंदू एकता और सांस्कृतिक गौरव”—दुबारा मुख्य चर्चा में आया।
धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री द्वारा मांगी गई माफी ने यह साबित किया कि विनम्रता और जिम्मेदारी किसी भी धार्मिक आंदोलन को मजबूत बनाती है। भीड़ में हुई धक्का-मुक्की जैसी छोटी-मोटी अव्यवस्था को लेकर सार्वजनिक रूप से क्षमा मांगना उनकी परिपक्वता और संत समाज के प्रति सम्मान को दर्शाता है।
उनके इस कदम ने न केवल विवाद को शांत किया, बल्कि यह भी दिखाया कि हिंदू राष्ट्र की रैली का उद्देश्य केवल धर्म जागरण है, न कि किसी को परेशान करना।

