Wednesday, January 28, 2026

कब होगी कलश स्थापना? नवरात्रि की पूरी जानकारी

चैत्र शुक्लपक्ष प्रतिपदा से भारतीय नववर्ष प्रारम्भ होता है| इस साल नववर्ष 30 मार्च 2025 रविवार को मनाया जाएगा। 30 मार्च 2025 से ही देवी आराधना के 9 दिवसीय महापर्व वासंतिक नवरात्रि शुरू होने जा रहे हैं।

इस साल के चैत्र नवरात्रि की पूरी जानकारी

नवरात्र की प्रतिपदा का व्रत रविवार दिनांक 30 मार्च को होगा, अष्टमी व्रत शनिवार 5 अप्रैल को होगा। महानिशा अष्टमी पूजन भी इस दिन 5 अप्रैल की रात्रि में होगा। 6 अप्रैल को श्रीरामनवमी व्रत, महानवमी व्रत, नवमी हवन, पूर्णाहुति, बलिदान और नवरात्र समाप्ति होगी

नवरात्रि कलश स्थापना मुहूर्त्त –

कलश स्थापना मुहूर्त्त –
सूर्योदय 06:25 से लेकर 10:25 AM तक
अभिजित् मुहूर्त्त 12:08 – 12:56 PM तक

रविवार 30 मार्च को दोपहर 14:36 बजे तक प्रतिपदा तिथि रहेगी। इस साल चित्रा नक्षत्र व वैधृति योग नहीं है इसलिए प्रातःकाल सूर्योदय से लेकर दोपहर तक कलश स्थापना का मुहूर्त्त रहेगा। कलश स्थापन प्रातः काल व अभिजित मुहूर्त दोनों दोनों में किया जा सकता है।

इस दिन कलश स्थापन, विक्रम नववर्ष आरम्भ 2082, गुड़ी पड़वा, सप्तशती पाठ आरम्भ, ध्वजारोपण, पंचांग फल श्रवण, चेटीचंड झूलेलाल जयन्ती और केशव बलिराम हेडगेवार जयन्ती है।

द्वितीया, सोमवार 31 मार्च दोपहर के 12:11 बजे तक है
सिंजारा

तृतीया, मंगलवार 1 अप्रैल प्रातः के 09:46 बजे तक है
गणगौर पूजा, मत्स्यावतार जयन्ती

चतुर्थी, बुधवार 2 अप्रैल प्रातः 07:26 बजे तक है, पंचमी का क्षय होकर अगले दिन प्रातः 05:15 तक है
श्रीपंचमी

षष्ठी, गुरुवार 3 अप्रैल रात्रि 27:20 बजे तक है
यमुना जयन्ती

सप्तमी, शुक्रवार 4 अप्रैल रात्रि 25:42 बजे तक है
सूर्य सप्तमी

अष्टमी, शनिवार 5 अप्रैल रात्रि 24:26 बजे तक है
सूर्योदय के समय अष्टमी तिथि होने से महाष्टमी (दुर्गाष्टमी) व्रत, रात्रि में महानिशा पूजा

नवमी, रविवार 6 अप्रैल रात्रि 23:36 बजे तक है
श्रीरामनवमी, नवरात्रि पाठ पूर्णाहुति हवन, महाबलिदान, महानवमी व्रत, श्रीरामजन्मभूमि मंदिर अयोध्या में श्रीरामजन्म

29 मार्च को नहीं बनेगा षडग्रही योग, न ही ग्रहण, न ही शनि गोचर

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Mudit
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लेखक 'भारतीय ज्ञान परंपरा' के अध्येता हैं। वे पिछले एक दशक से सार्वजनिक विमर्श पर विश्लेषणात्मक लेखन कर रहे हैं। सांस्कृतिक सन्दर्भ में समाज, राजनीति, विचारधारा, शिक्षा, धर्म और इतिहास के प्रमुख प्रश्नों के रिसर्च बेस्ड प्रस्तुतिकरण और समाधान में वे पारंगत हैं। वे 'द पैम्फलेट' में दो वर्ष कार्य कर चुके हैं। वे विषयों को केवल घटना के स्तर पर नहीं, बल्कि उनके ऐतिहासिक आधार, वैचारिक पृष्ठभूमि और दीर्घकालीन प्रभाव के स्तर पर परखते हैं। इसी कारण उनके राष्ट्रवादी लेख पाठक को नई दृष्टि और वैचारिक स्पष्टता भी देते हैं। इतिहास, धर्म और संस्कृति पर उनकी पकड़ व्यापक है। उनके प्रामाणिक लेख अनेक मौकों पर राष्ट्रीय विमर्श की दिशा में परिवर्तनकारी सिद्ध हुए हैं। उनका शोधपरक लेखन सार्वजनिक संवाद को अधिक तथ्यपरक और अर्थपूर्ण बनाने पर केंद्रित है।
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