कैडेट सार्थक
कुछ महीने पहले करणदीप राणा के लापता होने का मामला सामने आया था, अब 3 फरवरी 2026 को मर्चेंट नेवी कैडेट सार्थक मोहापात्रा भी रहस्यमय तरीके से गायब हो गए। 183 मीटर लंबे जहाज से किसी व्यक्ति का अचानक लापता होना, सुरक्षा व्यवस्था और जांच प्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
2 फरवरी को सार्थक की वीडियो कॉल से घर में बात हुई थी और सब ठीक था। उसी दिन उन्होंने मां, परिवार के अन्य सदस्यों और दोस्तों से भी बातचीत की। 3 फरवरी की सुबह से सार्थक का कोई संपर्क नहीं हुआ और इसी समय से उनका पता नहीं चल सका।
जहाज पर आखिरी बार केबिन में जाते दिखे, 8:30 बजे कमरा खाली मिला
3 फरवरी की सुबह सार्थक को आखिरी बार अपने केबिन में जाते देखा गया। सुबह करीब 8:30 बजे चीफ ऑफिसर उनसे मिलने पहुंचे तो केबिन खाली मिला। इसके तुरंत बाद पूरे जहाज में तलाशी शुरू कर दी गई, अलार्म बजाया गया और सभी क्रू मेंबर की गिनती कराई गई।
गिनती के बाद यह स्पष्ट हुआ कि सार्थक जहाज पर मौजूद नहीं हैं। इसके बाद जहाज की रफ्तार कम की गई और आसपास के समुद्री क्षेत्र में खोज तेज कर दी गई। मॉरिशस के मैरीटाइम रेस्क्यू कोऑर्डिनेशन सेंटर को सूचना दी गई और संयुक्त खोज अभियान चलाया गया, लेकिन रिपोर्टिंग समय तक कोई सुराग नहीं मिला।
ईए जर्सी जहाज वेस्ट अफ्रीका से सिंगापुर लौट रहा था, मॉरिशस के पास घटना
सार्थक एंग्लो ईस्टर्न शिप मैनेजमेंट कंपनी में कैडेट थे और ईए जर्सी नाम के जहाज पर तैनात थे। जहाज वेस्ट अफ्रीका से सिंगापुर लौट रहा था और मॉरिशस के पास सार्थक गायब हुए। जहाज के भीतर तलाशी, अलार्म और समुद्री क्षेत्र में खोज के बावजूद उनकी स्थिति स्पष्ट नहीं हुई।
परिवार के अनुसार 3 फरवरी को मां ने फोन किया तो कॉल का जवाब नहीं मिला। इसके बाद कंपनी की ओर से आधिकारिक पत्र के जरिए बताया गया कि सार्थक लापता हैं और उनकी खोज की जा रही है। यह सूचना मिलने के बाद परिवार ने तुरंत जांच की मांग तेज कर दी।
14 जुलाई 2025 को जॉइनिंग, इंटर्नशिप के अंतिम चरण में थे सार्थक
सार्थक ने 14 जुलाई 2025 को कंपनी जॉइन की थी। उनकी मां के मुताबिक वह पिछले 16 महीनों से कंपनी में इंटर्नशिप कर रहे थे और केवल दो महीने शेष थे। यह उनकी आखिरी जहाज यात्रा थी और इंटर्नशिप पूरी होने के बाद उन्हें थर्ड ऑफिसर के पद पर तैनाती मिलनी थी।
सार्थक रोज फोन पर घर बात करते थे, नौकरी उन्हें पसंद थी और किसी परेशानी की बात उन्होंने नहीं कही थी। 2 फरवरी की वीडियो कॉल में भी किसी तनाव, डर या असुरक्षा का संकेत नहीं था। इसके बाद अगले ही दिन उनका गायब होना परिवार के लिए अस्वीकार्य और गंभीर संदेह का विषय बन गया।
परिवार को 7:30 बजे फोन, अगले दिन बताया गया 6:20 बजे से लापता
3 फरवरी की शाम करीब 7:30 बजे भुवनेश्वर में कैप्टन देबाशीष पटनायक का फोन परिवार को आया और पते की जानकारी ली गई। अगले दिन सुबह बताया गया कि सार्थक सुबह 6:20 बजे से लापता हैं। इसके बाद कैप्टन परिवार के घर पहुंचे और लापता होने का पत्र सौंपा गया।
सार्थक की मां ने सवाल उठाया कि समुद्र के बीच कोई व्यक्ति अपने कमरे से कैसे गायब हो सकता है। उन्होंने यह आशंका जताई कि किसी ने उन्हें छिपाया है और यह घटना सुनियोजित लगती है। परिवार ने उच्च अधिकारियों से निष्पक्ष जांच की मांग की है।
एक के बाद एक लापता मामलों की श्रृंखला, कंपनी पर जवाबदेही तय करने की मांग
एंग्लो ईस्टर्न और उससे जुड़ी शिप मैनेजमेंट प्रणाली के भीतर बार बार लोगों के लापता होने का आरोप गंभीर रूप से उठ रहा है। इस क्रम में पहले कैडेट करणदीप राणा के लापता होने की बात सामने आई, उससे पहले 2nd Officer संदीप कुमार, ट्रेनी अश्विन कुमार, 3rd Officer सूबोब्रत बिस्वाल और फेबिन जेम्स भी लापता हो चुके हैं।
हर साल ऐसी घटनाएं होती हैं, फिर भी कंपनी पर ठोस कार्रवाई नहीं होती और न ही जिम्मेदारों की पहचान सार्वजनिक रूप से तय होती है। सरकारें भी ऐसे मामलों में निर्णायक कदम नहीं उठातीं और जांच प्रक्रिया औपचारिकताओं में उलझकर कमजोर पड़ जाती है, यह शिकायत लगातार सामने आती रहती है।
परिवारों की अनसुनी, जांच के नाम पर लीपापोती और मामला दबाने के आरोप
समुद्र में लापता होने की घटनाओं में परिवारों का कहना है कि प्रशासन और कंपनी की प्राथमिकता सच तक पहुंचने के बजाय मामला शांत कराने की होती है। परिवार शिकायतें लेकर भटकते रहते हैं, लेकिन जवाबदेही तय नहीं होती। समय के साथ परिवार मजबूरी में दर्द के साथ जीना सीखते हैं और लापता लोगों के नाम सिस्टम में गुम हो जाते हैं।
सार्थक के मामले में भी यही प्रश्न उठा रहा है कि कंपनी और जहाज पर मौजूद साथी ही बता सकते हैं कि आखिर हुआ क्या। जहाज के भीतर कौन कहां था, किसकी ड्यूटी थी, किसने आखिरी बार देखा, इन सबका रिकॉर्ड सामने लाना जांच की बुनियादी शर्त है।
शोषण और साजिश के आरोप, जहाज पर सर्विलांस व्यवस्था की मांग
अनेक विश्लेषकों का कहना कि जहाजों पर कैडेट और जूनियर स्टाफ के साथ सीनियर अधिकारियों द्वारा शोषण होता है। विरोध करने पर उन्हें समुद्र में गिरा देने और फिर इसे हादसा घोषित कर देने जैसी आशंकाएं जताई जा रही हैं। इसी आधार पर मामले को आपराधिक साजिश की दिशा में भी जांचने की मांग की जा रही है।
कई सौ करोड़ की बड़ी शिप पर हर जगह कैमरे होने चाहिए, खासकर उन स्थानों पर जहां दुर्घटना की संभावना रहती है। केबिन कॉरिडोर, डेक, सीढ़ियां, रेलिंग एरिया, एंट्री एग्जिट प्वाइंट और रिस्ट्रिक्टेड जोन में कैमरा कवरेज और रिकॉर्डिंग का सुरक्षित बैकअप अनिवार्य होना चाहिए।
आत्महत्या की थ्योरी पर परिवार की आपत्ति, भारत सरकार से गंभीर कार्रवाई की मांग
परिवार का कहना है कि प्रशिक्षण और पढ़ाई के दौरान कैडेटों को मानसिक रूप से इतना मजबूत बनाया जाता है कि आत्महत्या का कोई तर्क नहीं बचता। बच्चा हंसी खुशी फोन पर बात करता है और उसके तुरंत बाद लापता हो जाता है, इसलिए इसे सामान्य घटना मानकर नहीं छोड़ा जा सकता।
परिवार ने शिपिंग कंपनी से निष्पक्ष जांच, दोषियों की पहचान और सजा की दिशा में ठोस प्रयास की मांग रखी है। साथ ही भारत सरकार से यह मांग की गई है कि ऐसे मामलों में कठोर निगरानी, अंतरराष्ट्रीय समन्वय, पारदर्शी जांच और कंपनियों की जवाबदेही तय करने के लिए गंभीर ऐक्शन लिया जाए।

