Wednesday, March 4, 2026

71 साल की उम्र में बने CA: पोती की पढ़ाई में मदद करते हुए मिला नया जीवन लक्ष्य

जयपुर के रहने वाले 71 वर्षीय तारा चंद अग्रवाल ने साबित कर दिया कि सीखने की कोई उम्र नहीं होती। पूर्व बैंक अधिकारी ने चार्टर्ड अकाउंटेंट की कठिन परीक्षा पास कर एक मिसाल कायम की है।

तारा चंद अग्रवाल, जो कभी स्टेट बैंक ऑफ बीकानेर एंड जयपुर (SBBJ) में असिस्टेंट जनरल मैनेजर रह चुके हैं, ने 2014 में रिटायरमेंट लिया था।

पर ज़िंदगी का सबसे बड़ा इम्तिहान उन्होंने रिटायरमेंट के बाद दिया, वो भी न केवल पास किया, बल्कि हजारों युवाओं के लिए प्रेरणा बन गए।

शुरुआत पोती की पढ़ाई से हुई…

उनकी इस नयी यात्रा की शुरुआत तब हुई जब वो अपनी पोती को CA की पढ़ाई में मदद कर रहे थे। एक सामान्य सहयोग धीरे-धीरे उनके अंदर पढ़ाई का जुनून जगाने लगा। 2021 में, जब उनकी उम्र 69 वर्ष थी, उन्होंने खुद CA बनने का फैसला किया।

कोचिंग नहीं, किताबें और यूट्यूब बना सहारा

तारा चंद जी ने बिना किसी कोचिंग के, केवल किताबों और यूट्यूब वीडियो के माध्यम से पढ़ाई की। कभी अपने छोटे बेटे की जनरल स्टोर पर बैठकर पढ़ते, तो कभी दिन में 10 घंटे तक किताबों में डूबे रहते।

गीता ने दी प्रेरणा, पत्नी की याद ने बढ़ाया संकल्प

2020 में पत्नी के निधन के बाद वे मानसिक रूप से टूट गए थे। इसी दौरान भगवद् गीता उनके जीवन में संबल बनी। उन्होंने बताया कि गीता के उपदेशों ने उन्हें अंदर से मजबूत किया और आत्मबोध की दिशा में प्रेरित किया। परिवार ने उन्हें आगे बढ़ने के लिए लगातार प्रोत्साहित किया।

एक बार असफल हुए, लेकिन हार नहीं मानी

CA के फाइनल एग्ज़ाम में वे एक बार असफल भी हुए, पर उन्होंने हार नहीं मानी। दोबारा प्रयास कर 2025 में परीक्षा उत्तीर्ण की।

“जहां चाह, वहां राह”: इंटरनेट पर वायरल

उनकी इस उपलब्धि को CA निखिलेश कटारिया ने लिंक्डइन पर साझा किया, जिसके बाद यह कहानी सोशल मीडिया पर वायरल हो गई। हजारों यूज़र्स ने उन्हें बधाई दी और इसे “साल की सबसे प्रेरक कहानी” बताया।

CA रिज़ल्ट 2025

6 जुलाई 2025 को ICAI ने CA फाइनल परीक्षा का परिणाम घोषित किया। इस बार कुल 14,247 उम्मीदवार पास हुए। महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजीनगर से रंजन काबरा ने 600 में से 516 अंक लाकर AIR-1 हासिल किया। निष्ठा बोथरा (AIR-2) और मानव राकेश शाह (AIR-3) रहे।

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Samudra
Samudra
लेखक 'भारतीय ज्ञान परंपरा' के अध्येता हैं। वे पिछले एक दशक से सार्वजनिक विमर्श पर विश्लेषणात्मक लेखन कर रहे हैं। सांस्कृतिक सन्दर्भ में समाज, राजनीति, विचारधारा, शिक्षा, धर्म और इतिहास के प्रमुख प्रश्नों के रिसर्च बेस्ड प्रस्तुतिकरण और समाधान में वे पारंगत हैं। वे 'द पैम्फलेट' में दो वर्ष कार्य कर चुके हैं। वे विषयों को उनके ऐतिहासिक आधार, वैचारिक पृष्ठभूमि और दीर्घकालीन प्रभाव के स्तर पर परखते हैं। इसी कारण उनके राष्ट्रवादी लेख पाठक को नई दृष्टि और वैचारिक स्पष्टता भी देते हैं। उनके शोधपरक लेख अनेक मौकों पर राष्ट्रीय विमर्श की दिशा में परिवर्तनकारी सिद्ध हुए हैं।
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