Saturday, January 31, 2026

BHU में खूनी संघर्ष: रुया और बिरला हॉस्टल के छात्र आपस में भिड़े, ईंट-पत्थर चले, छावनी में तब्दील हुआ कैंपस

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वाराणसी: शिक्षा की राजधानी कही जाने वाली ‘महामना की बगिया’ यानी काशी हिन्दू विश्वविद्यालय (BHU) गुरुवार को एक बार फिर रणक्षेत्र में तब्दील हो गई। विश्वविद्यालय परिसर में छात्रों के दो गुटों के बीच जमकर बवाल हुआ। रुया (संस्कृत ब्लॉक) और बिरला हॉस्टल के छात्र पुरानी रंजिश को लेकर आमने-सामने आ गए। देखते ही देखते ईंट-पत्थर चलने लगे और पूरा इलाका पुलिस छावनी में बदल गया। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए भारी संख्या में पुलिस बल और पीएसी (PAC) के जवानों को तैनात करना पड़ा है।

पुरानी रंजिश ने लिया हिंसक रूप: डिबार्ड छात्रों ने की पीयूष तिवारी की पिटाई, फिर शुरू हुआ तांडव

घटना की शुरुआत गुरुवार दोपहर को हुई जब रुया छात्रावास में रहने वाले छात्र पीयूष तिवारी को निशाना बनाया गया। प्राप्त जानकारी के मुताबिक, बिरला छात्रावास के पास पहले से घात लगाए बैठे चार डिबार्ड (निष्कासित) छात्रों ने पीयूष की बेरहमी से पिटाई कर दी। जैसे ही इस मारपीट की खबर रुया हॉस्टल पहुंची, वहां के छात्र आक्रोशित हो गए और भारी संख्या में बिरला चौराहे पर जमा हो गए।

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BHU में खूनी संघर्ष: रुया और बिरला हॉस्टल के छात्र आपस में भिड़े, ईंट-पत्थर चले, छावनी में तब्दील हुआ कैंपस 2

इसके जवाब में बिरला हॉस्टल के छात्र भी बाहर निकल आए। दोनों गुटों के बीच पहले गाली-गलौज हुई और फिर जमकर पथराव शुरू हो गया। इस खूनी संघर्ष में रुया हॉस्टल के एक छात्र को गंभीर चोटें आई हैं, जिसका इलाज ट्रॉमा सेंटर में चल रहा है।

बिरला चौराहे पर पथराव: महामना की बगिया बनी जंग का मैदान

उपद्रव इतना बढ़ा कि बिरला चौराहे पर अफरा-तफरी मच गई। छात्रों के हाथों में पत्थर और डंडे थे। मौके की नजाकत को देखते हुए कई थानों की पुलिस, इंस्पेक्टर और बीएचयू चौकी प्रभारी फौरन मौके पर पहुंचे। छात्रों को समझाने की कोशिश की गई, लेकिन माहौल तनावपूर्ण बना रहा।

डीसीपी काशी जोन गौरव बंसवाल और डीसीपी क्राइम ने खुद मोर्चा संभाला। प्रशासन के मुताबिक, यह झगड़ा किसी शैक्षणिक मुद्दे या यूजीसी के नियमों को लेकर नहीं, बल्कि छात्रों के बीच वर्चस्व और पुरानी रंजिश का नतीजा है, जिसे कुछ अराजक तत्वों ने हवा दी।

एक्शन मोड में प्रशासन: हॉस्टलों में अवैध छात्रों की तलाश, कमरे होंगे सील

हिंसा के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन और पुलिस अब सख्त ‘एक्शन मोड’ में आ गए हैं। डीसीपी गौरव बंसवाल ने स्पष्ट किया है कि हॉस्टलों में अवैध रूप से रह रहे (Illegal occupants) छात्र ही इस तरह की घटनाओं के मुख्य सूत्रधार हैं। पुलिस और प्रॉक्टोरियल बोर्ड की टीमें अब हॉस्टलों में घुसकर ‘सर्जिकल स्ट्राइक’ के अंदाज में चेकिंग अभियान चला रही हैं।

एक-एक छात्र की आईडी चेक की जा रही है। डीसीपी ने साफ कर दिया है कि जो भी अनाधिकृत छात्र हॉस्टल में मिलेगा, उसका कमरा सील किया जाएगा और उसे बाहर का रास्ता दिखाया जाएगा। कैंपस में किसी भी बाहरी व्यक्ति को घुसने नहीं दिया जा रहा है।

यूजीसी विवाद नहीं, आपसी रंजिश: डीसीपी ने किया साफ, उपद्रवियों की खैर नहीं

शुरुआत में यह अफवाह उड़ी थी कि यह प्रदर्शन यूजीसी (UGC) के नए नियमों के विरोध में हो रहा है, लेकिन पुलिस ने इसे सिरे से खारिज कर दिया है। डीसीपी बंसवाल ने मीडिया से बातचीत में कहा, “यह पूर्णतः गलत है। झगड़ा छोटी सी बात और पुरानी रंजिश को लेकर शुरू हुआ था, जिसमें कुछ पूर्व और अनाधिकृत छात्रों ने घी डालने का काम किया। हम उन्हें चिह्नित कर रहे हैं और उनकी गिरफ्तारी के लिए छापेमारी जारी है।” फिलहाल कैंपस में स्थिति नियंत्रण में है, लेकिन तनाव को देखते हुए चप्पे-चप्पे पर पुलिस बल तैनात है।

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Mudit
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लेखक 'भारतीय ज्ञान परंपरा' के अध्येता हैं। वे पिछले एक दशक से सार्वजनिक विमर्श पर विश्लेषणात्मक लेखन कर रहे हैं। सांस्कृतिक सन्दर्भ में समाज, राजनीति, विचारधारा, शिक्षा, धर्म और इतिहास के प्रमुख प्रश्नों के रिसर्च बेस्ड प्रस्तुतिकरण और समाधान में वे पारंगत हैं। वे 'द पैम्फलेट' में दो वर्ष कार्य कर चुके हैं। वे विषयों को केवल घटना के स्तर पर नहीं, बल्कि उनके ऐतिहासिक आधार, वैचारिक पृष्ठभूमि और दीर्घकालीन प्रभाव के स्तर पर परखते हैं। इसी कारण उनके राष्ट्रवादी लेख पाठक को नई दृष्टि और वैचारिक स्पष्टता भी देते हैं। इतिहास, धर्म और संस्कृति पर उनकी पकड़ व्यापक है। उनके प्रामाणिक लेख अनेक मौकों पर राष्ट्रीय विमर्श की दिशा में परिवर्तनकारी सिद्ध हुए हैं। उनका शोधपरक लेखन सार्वजनिक संवाद को अधिक तथ्यपरक और अर्थपूर्ण बनाने पर केंद्रित है।
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