खामेनेई की मौत से क्षेत्र में भूचाल
ईरान के सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह अली खामेनेई, 86 वर्ष, शनिवार 28 फरवरी 2026 को हुए अमेरिकी इज़रायली संयुक्त सैन्य अभियान में मारे गए। इस घटनाक्रम ने न केवल ईरान की सत्ता संरचना को झकझोर दिया है, बल्कि पूरे पश्चिम एशिया में अस्थिरता की आशंकाएं बढ़ा दी हैं।
ईरानी सरकार ने 40 दिनों के राष्ट्रीय शोक की घोषणा की है। हमला उस व्यापक सैन्य कार्रवाई का हिस्सा था जिसका उद्देश्य ईरान की मौजूदा धार्मिक शासन व्यवस्था को कमजोर करना और क्षेत्रीय शक्ति संतुलन को बदलना बताया जा रहा है।
शीर्ष सुरक्षा नेतृत्व भी निशाने पर
हमलों में ईरान के कई वरिष्ठ सुरक्षा अधिकारी भी मारे गए। इनमें रक्षा मंत्री, रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स के कमांडर और राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के सचिव शामिल बताए जा रहे हैं। इन मौतों ने ईरान की सैन्य कमान को एक साथ गहरा झटका पहुंचाया है।
सत्ता तंत्र के उच्च स्तर पर एक साथ हुए इन प्रहारों ने संकेत दिया कि हमले की योजना लंबे समय से तैयार की गई थी। एक ही समय पर कई रणनीतिक बैठकों को लक्ष्य बनाकर कार्रवाई की गई, जिससे नेतृत्व संरचना अस्थिर हो गई।
तेहरान में विस्फोट और दहशत
शनिवार सुबह तेहरान सहित पश्चिमी और मध्य ईरान में जोरदार धमाकों की आवाजें गूंज उठीं। राजधानी के आसमान में धुएं के विशाल गुबार देखे गए। कई सैन्य प्रतिष्ठानों, मिसाइल ठिकानों और वायु रक्षा प्रणालियों को निशाना बनाया गया।
शहरों में अफरातफरी का माहौल बन गया। लोग घरों की ओर भागते दिखे, स्कूलों से बच्चे बाहर निकलते नजर आए। कुछ इलाकों में संचार सेवाएं बाधित हो गईं, जिससे हालात की स्पष्ट जानकारी जुटाना मुश्किल हो गया।
नागरिकों की मौत और विवाद
हमलों में बड़ी संख्या में नागरिकों के मारे जाने की खबर सामने आई। देशभर में दो सौ से अधिक लोगों की मौत का आंकड़ा सामने आया है। कई आवासीय क्षेत्रों में भी विस्फोट हुए, जिससे नागरिक सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े हुए।
दक्षिणी ईरान में एक लड़कियों के प्राथमिक विद्यालय पर हमले में कम से कम 85 बच्चियों की मौत की सूचना है। कई छात्राएं मलबे में दब गईं। सप्ताह के पहले कार्यदिवस पर हुआ यह हमला जनभावनाओं को और भड़का गया।
ईरान की जवाबी कार्रवाई
हमलों के कुछ ही घंटों बाद ईरान ने मिसाइल और ड्रोन दागकर जवाब दिया। इज़रायल में सायरन बजने लगे और नागरिकों को बंकरों में जाने के निर्देश दिए गए। राजधानी तेल अवीव के ऊपर अवरोधक प्रणालियों द्वारा मिसाइलों को हवा में नष्ट करते दृश्य दिखाई दिए।
संघर्ष सीमाओं से बाहर फैल गया। सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, कतर, बहरीन और कुवैत ने अपने क्षेत्रों की ओर बढ़ते ईरानी हमलों या अवरोधन की जानकारी दी। जॉर्डन ने दर्जनों ड्रोन और बैलिस्टिक मिसाइलों को मार गिराया।
बड़े पैमाने का सैन्य अभियान
करीब दो सौ लड़ाकू विमानों ने पश्चिमी और मध्य ईरान में पांच सौ के आसपास लक्ष्यों पर हमले किए। यह इज़रायल के इतिहास का सबसे बड़ा वायु अभियान माना जा रहा है। मिसाइल उद्योग, वायु रक्षा तंत्र और नौसैनिक ढांचे को व्यापक क्षति पहुंचाई गई।
महीनों से तैयार किए गए लक्ष्य बैंक के आधार पर वरिष्ठ अधिकारियों की तीन अलग अलग बैठकों को एक साथ निशाना बनाया गया। समन्वित हमले ने स्पष्ट किया कि कार्रवाई आकस्मिक नहीं बल्कि योजनाबद्ध थी।
परमाणु कार्यक्रम पर टकराव
हमले से पहले यह आरोप लगाया गया था कि ईरान अपना परमाणु कार्यक्रम फिर सक्रिय कर रहा है। हालांकि अंतरराष्ट्रीय परमाणु निरीक्षण एजेंसियों ने हाल में यूरेनियम संवर्धन फिर शुरू होने के प्रमाण नहीं पाए थे। इस दावे और वास्तविक आकलनों के बीच मतभेद बने हुए हैं।
सैन्य कार्रवाई ने उस कूटनीतिक प्रक्रिया को अचानक विराम दे दिया जो परमाणु कार्यक्रम को सीमित करने के लिए चल रही थी। जिनेवा में हालिया वार्ता के बावजूद तनाव कम होने के संकेत नहीं मिल रहे थे।
शासन परिवर्तन की खुली चर्चा
अमेरिकी नेतृत्व ने स्पष्ट संकेत दिया कि मौजूदा धार्मिक शासन को हटाना दीर्घकालिक उद्देश्य है। ईरानी जनता से अपील की गई कि बमबारी थमने के बाद वे अपनी सरकार अपने हाथ में लें। यह बयान सीधे राजनीतिक हस्तक्षेप की दिशा में जाता है।
हाल के महीनों में ईरान में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुए थे जिन्हें कठोरता से दबाया गया। हजारों लोगों की मौत के दावे सामने आए थे। ऐसे माहौल में बाहरी सैन्य दबाव और आंतरिक असंतोष का संगम अस्थिरता बढ़ा सकता है।
केवल हवाई हमलों से सत्ता परिवर्तन कठिन
जमीनी सेना भेजने के संकेत फिलहाल नहीं दिखते। सैन्य विशेषज्ञों का आकलन है कि केवल हवाई हमलों से किसी स्थापित शासन को गिराना बेहद कठिन होता है। सत्ता संरचना अक्सर बिखरती जरूर है, लेकिन पूरी तरह समाप्त नहीं होती।
इसलिए यह स्पष्ट नहीं है कि नेतृत्व पर हमले के बाद देश में व्यापक जनविद्रोह होगा या सुरक्षा बल पहले की तरह विरोध को दबा देंगे। स्थिति अत्यंत अनिश्चित बनी हुई है।
संयुक्त राष्ट्र की चेतावनी
संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुतारेस ने सैन्य कार्रवाइयों की कड़ी निंदा की है। उन्होंने इसे अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बताया। उनका कहना है कि सैन्य कार्रवाई घटनाओं की ऐसी श्रृंखला शुरू कर सकती है जिसे नियंत्रित करना संभव नहीं रहेगा।
उन्होंने दोहराया कि स्थायी शांति केवल संवाद और वार्ता के माध्यम से ही संभव है। वर्तमान परिस्थितियों में क्षेत्र पहले से अधिक ज्वलनशील हो चुका है और व्यापक युद्ध की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।
इज़रायल में आपातकाल और खाड़ी में असर
इज़रायल ने अपना हवाई क्षेत्र बंद कर दिया है और 48 घंटे का आपातकाल घोषित किया गया। अस्पतालों को भूमिगत सुरक्षित परिसरों में स्थानांतरित किया गया। नागरिकों को लगातार सतर्क रहने और शरणस्थलों में जाने के निर्देश दिए गए।
खाड़ी क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य ठिकाने भी निशाने पर आए। बहरीन स्थित अमेरिकी नौसैनिक अड्डे के पास विस्फोट की सूचना मिली। संयुक्त अरब अमीरात में मिसाइल के मलबे से एक विदेशी नागरिक की मौत हुई।
आगे का परिदृश्य
संयुक्त सैन्य अभियान कुछ दिनों तक जारी रहने की संभावना है। मिसाइल कार्यक्रम और सैन्य अवसंरचना को कमजोर करना प्राथमिक लक्ष्य बताया जा रहा है। लेकिन खामेनेई की मौत ने ईरान की राजनीतिक संरचना को अनिश्चितता में डाल दिया है।
अब सवाल यह है कि सत्ता का उत्तराधिकार कैसे तय होगा और क्या क्षेत्रीय टकराव व्यापक युद्ध का रूप लेगा। पश्चिम एशिया पहले ही अस्थिर था, और यह घटना उस अस्थिरता को निर्णायक मोड़ दे सकती है।

