मध्य प्रदेश का धार भोजशाला विवाद: जब इतिहास की परतें खुलती हैं, तो सच सामने आ ही जाता है। मध्य प्रदेश के धार में स्थित भोजशाला परिसर से जुड़ा विवाद एक बार फिर सुर्खियों में है।
24 फरवरी 2026 को Archaeological Survey of India यानी ASI ने अपनी वैज्ञानिक रिपोर्ट Madhya Pradesh High Court की इंदौर बेंच में सौंप दी।
रिपोर्ट में कहा गया कि कमाल मौला मस्जिद प्राचीन मंदिरों के अवशेषों, शिल्प और शिलालेखों के टुकड़ों का उपयोग करके बनाई गई थी, और मौजूदा ढांचा कई सदियों बाद असंतुलित और एक समान डिजाइन के बिना तैयार किया गया प्रतीत होता है।
क्या है भोजशाला विवाद?
भोजशाला विवाद वर्षों से धार्मिक और ऐतिहासिक रूप से संवेदनशील मामला रहा है। हिंदू पक्ष इसे मां वाग्देवी का मंदिर मानता है, जबकि मुस्लिम पक्ष इसे कमाल मौला मस्जिद के रूप में देखता है।
ASI की रिपोर्ट इसी आधार पर तैयार की गई थी। अब अदालत ने दोनों समुदायों को अपने दावे और आपत्तियां प्रस्तुत करने को कहा है, ताकि एक संतुलित और न्यायसंगत निर्णय लिया जा सके।
ASI रिपोर्ट में क्या है खास?
मध्य प्रदेश का धार भोजशाला विवाद: ASI की टीम ने परिसर में 94 मूर्तियां और मूर्तिकला के हिस्से खोजे, जिनमें भगवान गणेश, ब्रह्मा, नरसिंह, भैरव और विभिन्न पशु आकृतियां शामिल हैं।
इसके साथ ही कई हिस्सों पर संस्कृत भाषा के शिलालेख भी मिले, जिन्हें 12वीं से 16वीं सदी का माना जा रहा है। इन खोजों से यह संकेत मिलता है कि मंदिर शैली की वास्तुकला और कला पहले से ही इस स्थान पर मौजूद थी।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि मौजूदा ढांचा संतुलित और एकसमान डिजाइन में नहीं बना है, बल्कि इसे बाद की सदियों में जोड़ा गया प्रतीत होता है।
कोर्ट में डिवीजन बेंच ने की सुनवाई
23 फरवरी 2026 को इंदौर हाई कोर्ट में जस्टिस विजय कुमार शुक्ला और जस्टिस आलोक अवस्थी की डिवीजन बेंच ने मामले की सुनवाई की।
कोर्ट ने ASI की 2100 पन्नों और 10 खंडों वाली रिपोर्ट को आगे की प्रक्रिया का आधार माना। कोर्ट ने यह नोट किया कि रिपोर्ट पहले ही सीलबंद लिफाफे से खोली जा चुकी है और सभी पक्षों को इसकी प्रति दी जा चुकी है।
इसके बावजूद किसी भी पक्ष ने अभी तक रिपोर्ट पर आपत्तियां, सुझाव या टिप्पणियां नहीं दी हैं।
कोर्ट की दो हफ्तों की मोहलत
मध्य प्रदेश का धार भोजशाला विवाद: कोर्ट ने सभी याचिकाकर्ताओं और प्रतिवादियों को दो हफ्तों के अंदर लिखित आपत्तियां और राय प्रस्तुत करने का निर्देश दिया।
साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया कि यथास्थिति बनाए रखी जाएगी, यानी पूजा और नमाज की वर्तमान व्यवस्था तब तक जारी रहेगी जब तक अगला फैसला नहीं आता।
अब 16 मार्च 2026 की सुनवाई तक सबकी निगाहें इसी फैसले पर टिकी हैं, जब कोर्ट इन आपत्तियों और सुझावों पर अंतिम फैसला सुनाएगी।
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