Thursday, January 29, 2026

लोकसभा में अमित शाह का तीखा हमला: ‘पहलगाम का बदला ले लिया गया’

गृह मंत्री अमित शाह ने लोकसभा में बताया कि पहलगाम में हुए आतंकी हमले का बदला सेना ने पूरी तरह से ले लिया है। ऑपरेशन सिंदूर के तहत तीनों हमलावर आतंकियों की पहचान की गई और उन्हें मार गिराया गया। उन्होंने यह भी बताया कि जांच में 1000 से अधिक लोगों से 3000 घंटे पूछताछ की गई।

आतंकियों की पहचान, चंडीगढ़ भेजी गई राइफलें

शाह ने जानकारी दी कि आतंकियों की राइफलें विशेष विमान से चंडीगढ़ भेजी गईं और वहाँ रातभर फायरिंग कर खोखों का मिलान किया गया। इससे साबित हुआ कि वही आतंकी पहलगाम हमले में शामिल थे। 22 जुलाई को आतंकियों की दाचीगाम में मौजूदगी की पुष्टि हुई, जिसके बाद सुरक्षा बलों ने उन्हें घेरकर 28 जुलाई को मार गिराया।

कांग्रेस पर हमला: ‘आतंकियों की मौत से भी नहीं हुई खुशी’

विपक्ष की प्रतिक्रिया पर शाह ने कहा कि उन्हें लगा था आतंकी मारे जाने की खबर पर विपक्ष खुश होगा, लेकिन उनके चेहरे पर स्याही छा गई। उन्होंने कहा कि 1055 से अधिक लोगों से पूछताछ, वीडियो विश्लेषण और FSL रिपोर्ट से पूरे घटनाक्रम की पुष्टि हुई।

चिदंबरम पर सीधा वार: ‘पाकिस्तान को क्लीन चिट क्यों?’

पूर्व गृहमंत्री पी. चिदंबरम पर निशाना साधते हुए शाह ने कहा कि उनके पास तीनों आतंकियों की पाकिस्तानी नागरिकता के सबूत हैं। उन्होंने सवाल किया कि चिदंबरम पाकिस्तानी आतंकियों का बचाव क्यों कर रहे हैं। शाह ने पाकिस्तानी वोटर कार्ड, हथियार और चॉकलेट तक का हवाला दिया।

मोदी सरकार का ट्रैक रिकॉर्ड और कांग्रेस की भूलें

गृह मंत्री ने कहा कि 2004 से 2014 के बीच 1770 नागरिक आतंकी घटनाओं में मारे गए, जबकि मोदी सरकार में यह संख्या घटकर 357 रह गई। आतंकियों के मारे जाने की संख्या में 123% की बढ़ोतरी दर्ज की गई। शाह ने बताया कि ऑपरेशन सिंदूर में मारे गए 10 में से 8 आतंकी चिदंबरम के कार्यकाल में सक्रिय थे।

POK और 1965, 1971 की भूलें: नेहरू को ठहराया जिम्मेदार

शाह ने कहा कि 1948 में भारतीय सेना कश्मीर में निर्णायक स्थिति में थी, लेकिन नेहरू ने सीजफायर कर दिया। 1965 में हाजी पीर पर कब्जा कर लौटाया गया। 1971 में 93 हजार पाकिस्तानी सैनिकों और 15 हजार वर्ग किलोमीटर क्षेत्रीय लाभ के बावजूद शिमला समझौते में POK की मांग ही नहीं की गई।

चीन और UNSC पर ऐतिहासिक चूक

गृह मंत्री ने बताया कि अमेरिका ने सुरक्षा परिषद में भारत को स्थायी सदस्य बनाने का प्रस्ताव दिया था, लेकिन नेहरू ने ठुकरा दिया ताकि चीन को बुरा न लगे। उन्होंने कहा कि नेहरू ने कहा था कि वहाँ घास का तिनका नहीं उगता और असम को अलविदा कह दिया था।

सोनिया, मनमोहन और हुर्रियत नेताओं पर आरोप

अमित शाह ने कहा कि UPA सरकार ने आते ही POTA कानून खत्म किया और हुर्रियत नेताओं को VIP ट्रीटमेंट दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि मनमोहन सरकार के प्रतिनिधि हुर्रियत नेताओं से बात करते थे जबकि मोदी सरकार ने हुर्रियत को पूरी तरह बैन कर दिया।

मोदी सरकार का कड़ा स्टैंड: एयरस्ट्राइक से लेकर सीजफायर तक

शाह ने कहा कि मोदी सरकार ने उरी के बाद सर्जिकल स्ट्राइक और पुलवामा के बाद एयरस्ट्राइक की। 9 मई 2025 को सेना को आदेश देकर पाकिस्तान के 11 एयरबेस पर हमला किया गया, जिससे पाकिस्तान का एयर डिफेंस ध्वस्त हो गया और 10 मई को पाक ने खुद ही सीजफायर की मांग की।

सलमान खुर्शीद और बाटला हाउस: ‘क्यों रोई थीं सोनिया?’

गृह मंत्री ने कांग्रेस नेता सलमान खुर्शीद के उस बयान को याद दिलाया जिसमें उन्होंने कहा था कि बाटला हाउस एनकाउंटर पर सोनिया गाँधी रोई थीं। शाह ने पूछा कि क्या आतंकियों के मारे जाने पर रोने वाली सरकार आतंक के खिलाफ कैसे लड़ सकती है?

‘UPA के समय आतंकी टहलते थे’: विपक्ष पर तंज

गृह मंत्री ने कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई के हंगामे पर तंज कसते हुए कहा कि कांग्रेस के समय आतंकियों को घुसपैठ की जरूरत नहीं पड़ती थी, वे वैसे ही आते-जाते थे जैसे आप पाकिस्तान जाते हैं। शाह ने दोहराया कि आतंकवाद के खिलाफ सरकार का रुख कठोर और अडिग रहेगा।

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Mudit
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लेखक 'भारतीय ज्ञान परंपरा' के अध्येता हैं। वे पिछले एक दशक से सार्वजनिक विमर्श पर विश्लेषणात्मक लेखन कर रहे हैं। सांस्कृतिक सन्दर्भ में समाज, राजनीति, विचारधारा, शिक्षा, धर्म और इतिहास के प्रमुख प्रश्नों के रिसर्च बेस्ड प्रस्तुतिकरण और समाधान में वे पारंगत हैं। वे 'द पैम्फलेट' में दो वर्ष कार्य कर चुके हैं। वे विषयों को केवल घटना के स्तर पर नहीं, बल्कि उनके ऐतिहासिक आधार, वैचारिक पृष्ठभूमि और दीर्घकालीन प्रभाव के स्तर पर परखते हैं। इसी कारण उनके राष्ट्रवादी लेख पाठक को नई दृष्टि और वैचारिक स्पष्टता भी देते हैं। इतिहास, धर्म और संस्कृति पर उनकी पकड़ व्यापक है। उनके प्रामाणिक लेख अनेक मौकों पर राष्ट्रीय विमर्श की दिशा में परिवर्तनकारी सिद्ध हुए हैं। उनका शोधपरक लेखन सार्वजनिक संवाद को अधिक तथ्यपरक और अर्थपूर्ण बनाने पर केंद्रित है।
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