Thursday, January 8, 2026

अकाल तख्त साहिब का तालिबानी फरमान: सिख मर्यादा के नाम पर सरकार की भूमिका और पुलिस पर की टीका टिप्पणी?

अमृतसर स्थित श्री अकाल तख्त साहिब में रविवार को आयोजित पांच सिंह साहिबानों की संयुक्त बैठक वर्ष 2025 की अंतिम बैठक होने के साथ-साथ बेहद निर्णायक भी साबित हुई।

इस उच्चस्तरीय बैठक में लिए गए फैसलों ने सिख धार्मिक परंपराओं की सीमाओं को फिर से स्पष्ट किया और साथ ही पंजाब सरकार तथा पुलिस प्रशासन के रवैये पर खुलकर असहमति दर्ज की।

यह बैठक केवल धार्मिक मुद्दों तक सीमित नहीं रही, बल्कि इसमें सामाजिक, तकनीकी और प्रशासनिक हस्तक्षेप जैसे विषयों पर भी गंभीर मंथन हुआ। सिंह साहिबानों ने स्पष्ट कर दिया कि सिख धर्म से जुड़े मामलों में किसी भी तरह की लापरवाही, राजनीति या चयनात्मक कार्रवाई स्वीकार नहीं की जाएगी।

आनंद कारज को लेकर सख्त रुख

बैठक के बाद श्री अकाल तख्त साहिब के कार्यकारी जत्थेदार कुलदीप सिंह गड़गज ने सिख संगत को संबोधित करते हुए कहा कि सिख विवाह परंपरा ‘आनंद कारज’ को लेकर मर्यादा से कोई समझौता नहीं किया जा सकता। उन्होंने स्पष्ट किया कि आनंद कारज अब केवल गुरुद्वारों में ही संपन्न होगा।

होटल, रिसॉर्ट, मैरिज पैलेस, पार्क या किसी भी प्रकार के व्यावसायिक या खुले स्थान पर आनंद कारज आयोजित करने की अनुमति नहीं होगी। सिंह साहिबानों का मानना है कि बीते वर्षों में इस पवित्र संस्कार को एक इवेंट या दिखावे के रूप में पेश करने की प्रवृत्ति बढ़ी है, जो सिख परंपरा की आत्मा के खिलाफ है।

गुरु ग्रंथ साहिब जी के पावन स्वरूप पर पूर्ण प्रतिबंध

बैठक में यह निर्णय भी दोहराया गया कि गुरु ग्रंथ साहिब जी के पावन स्वरूप को किसी भी निजी या विवाह स्थल पर ले जाना पूरी तरह वर्जित रहेगा। सिंह साहिबानों ने साफ शब्दों में कहा कि पावन स्वरूपों का सम्मान केवल धार्मिक मर्यादा के अनुसार ही सुनिश्चित किया जा सकता है।

इस विषय में किसी भी राजनीतिक दल, प्रशासनिक अधिकारी या सरकार के हस्तक्षेप को अस्वीकार्य बताया गया। जत्थेदार ने कहा कि गुरु ग्रंथ साहिब जी से जुड़े मामलों को न तो राजनीतिक सुविधा के आधार पर देखा जा सकता है और न ही इन्हें सामान्य कानून व्यवस्था का विषय मानकर निपटाया जा सकता है।

सिख गुरुओं पर AI आधारित फिल्मों और वीडियो पर रोक

बैठक में आधुनिक तकनीक के उपयोग पर भी विस्तार से चर्चा हुई। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के माध्यम से बनाए जा रहे धार्मिक वीडियो, फिल्में और डिजिटल कंटेंट को लेकर सिंह साहिबानों ने गंभीर चिंता जताई।

जत्थेदार कुलदीप सिंह गड़गज ने कहा कि तकनीक चाहे कितनी भी उन्नत क्यों न हो, लेकिन सिख गुरुओं, इतिहास और धार्मिक प्रसंगों को AI के जरिए प्रस्तुत करना सिख मर्यादा के अनुरूप नहीं है। उन्होंने कहा कि इस तरह के कंटेंट से धार्मिक भावनाओं के विकृत होने और परंपराओं के गलत चित्रण का खतरा रहता है।

इसी कारण यह निर्णय लिया गया कि सिख धर्म से जुड़े किसी भी विषय पर AI आधारित फिल्में या वीडियो स्वीकार नहीं किए जाएंगे।

पंजाब पुलिस के रवैये पर नाराजगी

बैठक में पंजाब पुलिस की कार्यशैली पर भी तीखी प्रतिक्रिया सामने आई। जत्थेदार कुलदीप सिंह गड़गज ने आरोप लगाया कि सोशल मीडिया पर सिखों के खिलाफ नफरत फैलाने वाले तत्वों के खिलाफ पुलिस गंभीर कार्रवाई करने में पूरी तरह विफल रही है।

उन्होंने बताया कि श्री अकाल तख्त साहिब और सचखंड श्री हरिमंदर साहिब प्रबंधन की ओर से कई बार ऐसे मामलों की लिखित शिकायतें पुलिस को दी गईं, लेकिन आज तक किसी भी दोषी पर ठोस कदम नहीं उठाया गया।

इसके विपरीत, निहंग स्वरूप में रहने वाले सिखों के खिलाफ मामूली घटनाओं पर तुरंत एफआईआर दर्ज कर दी जाती है। जत्थेदार ने कहा कि यह दोहरा रवैया सिख समुदाय में गहरी नाराजगी पैदा कर रहा है।

फर्जी सोशल मीडिया अकाउंट और प्रशासन की चुप्पी

सिंह साहिबानों ने यह भी कहा कि शरारती तत्व फर्जी सोशल मीडिया प्रोफाइल बनाकर सिख समुदाय के खिलाफ योजनाबद्ध तरीके से नफरत फैला रहे हैं। बावजूद इसके, पुलिस न तो ऐसे अकाउंट्स को बंद कराने में सफल हो रही है और न ही उनके पीछे छिपे लोगों तक पहुंच पा रही है।

जत्थेदार ने सवाल उठाया कि जब शिकायतें स्पष्ट रूप से दी जा चुकी हैं, तो फिर कार्रवाई क्यों नहीं हो रही। उन्होंने इसे न केवल प्रशासनिक लापरवाही बल्कि सामाजिक सौहार्द के लिए भी खतरा बताया।

पंजाब सरकार को दी गई कड़ी चेतावनी

पंजाब सरकार द्वारा की जा रही कानूनी कार्रवाई पर भी बैठक में असहमति जताई गई। जत्थेदार कुलदीप सिंह गड़गज ने कहा कि सरकार जिस सरदार ईश्वर सिंह जांच आयोग की रिपोर्ट का हवाला देकर अपने फैसलों को सही ठहराने का प्रयास कर रही है, उसी रिपोर्ट में स्पष्ट चेतावनी दर्ज है कि इन मामलों को साधारण प्रशासनिक ढांचे में नहीं देखा जाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि केवल यह मान लेना कि सरकारी कानून या पुलिस थाने ऐसे संवेदनशील मामलों को सही ढंग से संभाल लेंगे, सिख धर्म की गंभीरता को कम आंकने जैसा है।

अकाल तख्त साहिब का स्पष्ट संदेश

इस बैठक के जरिए श्री अकाल तख्त साहिब ने यह साफ कर दिया है कि सिख मर्यादा, गुरु ग्रंथ साहिब जी की पवित्रता और धार्मिक परंपराएं किसी भी राजनीतिक दबाव, तकनीकी प्रयोग या प्रशासनिक सुविधा से ऊपर हैं।

सिंह साहिबानों का यह रुख न केवल सिख संगत के लिए मार्गदर्शक है, बल्कि सरकार और प्रशासन के लिए भी एक स्पष्ट चेतावनी है कि धार्मिक मामलों में हस्तक्षेप या दोहरा रवैया अब स्वीकार नहीं किया जाएगा।

WhatsApp Channel Join Now
Telegram Channel Join Now
- Advertisement -
- Advertisement -

Latest article