Manipur: मणिपुर में लंबे समय से हिंसक घटनाएं चली आ रही है। इस हिंसक घटना में पाकिस्तान का नाम सामने आ रहा है। पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI इसकी साजिश रच रही है। इसके लिए सोशल मीडिया का सहारा लिया जा रहा है। इसके लिए बाकायदा 15-20 फेसबुक अकाउंट बनाए गए हैं। इसके माध्यम से कुकी और मैतेई समुदाय को भड़काने वाले कंटेंट-वीडियो डाले जा रहे हैं।
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Manipur: MCD के जरिए फैलाया जा रहा भड़काऊ कंटेंट
Manipur: ISI के साइबर सेल “मारखोर साइबर डिफेंस (MCD)” के जरिए सोशल मीडिया पर भड़काऊ कंटेंट फैलाया जा रहा है। इसके लिए 15-20 फेसबुक अकाउंट बनाए गए हैं, जो कुकी और मैतेई समुदायों के बीच नफरत भड़काने का काम कर रहे हैं। भारतीय खुफिया एजेंसियों ने कई ऐसे फेसबुक अकाउंट्स की पहचान की है, जिनका आईपी एड्रेस इस्लामाबाद का दिखाया गया, लेकिन वे रावलपिंडी के आर्मी एरिया से संचालित हो रहे हैं। इनमें से कुछ अकाउंट पाकिस्तान की इंटरनेट सर्विस प्रोवाइडर नयाटेल प्राइवेट लिमिटेड से जुड़े पाए गए हैं। इन अकाउंट्स से लगातार ऐसी पोस्ट डाली जा रही हैं, जो मणिपुर में अशांति को और बढ़ा सकती हैं।
PM और CM से लेकर सेना तक पर झूठे आरोप
Manipur: कभी प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री के खिलाफ जहर उगला जाता है, तो कभी सेना पर अत्याचार के झूठे आरोप लगाकर बांग्लादेश हिंसा के वीडियो शेयर किए जाते हैं। इसके अलावा, दलितों और ब्राह्मणों के बीच नफरत फैलाने वाला कंटेंट भी पोस्ट किया जा रहा है। पूर्व सेना प्रमुख एम.एम. नरवणे पहले ही इस बात की आशंका जता चुके हैं कि मणिपुर हिंसा में विदेशी ताकतों की भूमिका हो सकती है। रिटायर्ड मेजर जनरल डॉ. शशि भूषण अस्थाना का कहना है कि आधुनिक युद्ध में सोशल मीडिया एक बड़े हथियार के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है।
पाकिस्तान का हाथ
Manipur: मणिपुर में चल रही हिंसा में आईएसआई, आईएस या चीनी एजेंसियों की संलिप्तता को नकारा नहीं जा सकता। इससे पहले भी फेक न्यूज के जरिए ड्रोन को लेकर अफवाहें फैलाई गई थीं, जिसका सेना प्रमुख ने खंडन किया था। यह रिपोर्ट दर्शाती है कि भारत में जातीय और सांप्रदायिक हिंसा को बढ़ाने के लिए सोशल मीडिया का संगठित रूप से इस्तेमाल किया जा रहा है। अगर इन आरोपों में सच्चाई है, तो यह राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा है और इस पर कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए।
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