Chaitra Navratri: इस बार चैत्र नवरात्र और विक्रम संवत 2082 का शुभारंभ आज रविवार से हो गया। यह केवल एक त्योहार नहीं, बल्कि नव ऊर्जा, नव चेतना और मां दुर्गा की कृपा प्राप्त करने का स्वर्णिम अवसर है। इस बार की नवरात्र आठ दिनों की होगी, क्योंकि द्वितीया और तृतीया तिथियों का संयोग हो रहा है। यह दुर्लभ संयोग भक्तों को देवी की पूजा-अर्चना में अधिक समर्पण दिखाने का अवसर देगा। इस वर्ष का संवत्सर ‘सिद्धार्थी’ है, जो सिद्धि, समृद्धि और सफलता का प्रतीक माना जाता है। यह वर्ष विशेष रूप से व्यापार, शिक्षा और आध्यात्मिक उन्नति के लिए अत्यंत शुभ रहेगा। नवरात्रि के पहले दिन देवी दुर्गा के माता शैलपुत्री रूप की पूजा की जाती है।

इस बार नवरात्रि इसलिए है विशेष
पंडितों के अनुसार इस वर्ष की चैत्र नवरात्र कई दुर्लभ और शुभ संयोग लेकर आ रही है। द्वितीया और तृतीया तिथियों के मिलन से नवरात्रि आठ दिनों की होगी, जिससे भक्तों को देवी आराधना का अधिक फल मिलेगा। इसके अलावा, इस वर्ष का संवत्सर सिद्धार्थी है, जो जीवन में समृद्धि और सिद्धि लाने वाला है। पंडित शर्मा ने बताया कि जिन लोगों का लक्ष्य जीवन में नई शुरुआत, व्यापार, शिक्षा या आध्यात्मिक प्रगति है, उनके लिए यह संवत्सर विशेष शुभकारी रहेगा।
अखंड ज्योति जलाने का महत्व
नवरात्र के दौरान अखंड ज्योति जलाना अत्यंत शुभ माना जाता है। अखंड ज्योति का अर्थ है निरंतर जलने वाली लौ, जो मां दुर्गा का प्रतीक होती है। इसे जलाने से घर में देवी की कृपा बनी रहती है और सभी नकारात्मक ऊर्जा समाप्त हो जाती हैं। अखंड ज्योति जलाते समय शुद्ध घी या तिल के तेल का उपयोग करना श्रेष्ठ माना जाता है। यह ज्योति भक्तों की मनोकामनाओं को पूरा करती है और घर में सुख-शांति लाती है।
नवरात्र में पूजा की विधि
नवरात्र के दौरान सुबह और शाम दोनों समय मां दुर्गा की पूजा करना शुभ माना जाता है। सुबह कलश के पास दीप जलाकर मां दुर्गा का आह्वान करें और धूप, दीप, कर्पूर और गंध का प्रयोग करें। नौ दिनों तक मां दुर्गा के नौ स्वरूपों शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कूष्मांडा, स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी और सिद्धिदात्री की विधिपूर्वक पूजा करें। नवरात्रों में दुर्गा सप्तशती या देवी महात्म्य का पाठ करना अत्यंत फलदायी होता है। आरती के बाद श्रद्धा अनुसार प्रसाद चढ़ाएं और घर में भक्तिमय वातावरण बनाए रखें। अष्टमी और नवमी के दिन विशेष रूप से कन्या पूजन और हवन का आयोजन करें, जिससे मां दुर्गा की कृपा प्राप्त होती है।