30 मार्च 2025 से विक्रम संवत् 2082 चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से शुरू हो रहा है। यह संवत्सर 30 मार्च 2025 से 19 मार्च 2026 तक रहेगा। यह कलियुगाब्द 5126 होगा। संवत् 2082 का नाम ‘सिद्धार्थ‘ होगा। यह जानकारी जयपुर के प्रसिद्ध जयादित्य पंचांग द्वारा दी गई है:-
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Samvat 2082 में आकाश में ग्रहों की ऐसी बनी है सरकार
Samvat 2082: हर साल हिन्दू नववर्ष पर ज्योतिष के अनुसार आकाश में ग्रहों की सरकार का गठन होता है, इस आल 2082 में आकाश में ऐसी सरकार बनी है:-
राजा सूर्य
मन्त्री सूर्य
शस्येश गुरु
धान्येश मंगल
मेघेश सूर्य
रसेश शुक्र
नीरसेश बुध
फलेश शनि
धनेश सूर्य
दुर्गेश सूर्य
राजा सूर्य का फल
अब्दाधिपे दिनपतौ खलु मध्यवृष्टिर्मदप्रभर्क्ष गणशीतकरं नयश्च ।
हन्तुं सपत्न विषयान्निखिलक्षितीशा निन्त्यं चरन्ति भूवि भूरिबलं वृताश्च।।
(वशिष्ठ सं.पृ६८ श्लो११)
Samvat 2082: इस वर्ष सूर्य के शासक होने से अल्पवृष्टि, धान्य की उपज में न्यूनता, औसत दुग्ध उद्योग में तथा फलादि खाद्य पदार्थों में कमी रहेगी। चोरी, लूट, अपहरण जैसी अनेक घटनाएँ होंगी। उच्च स्तरीय नेता का वियोग होगा। पित्त, ज्वर एवं अतिसारादि रोगों से लोग अधिक पीड़ित रहेंगे। राष्ट्रविरोधियों को तथा अपराधियों को समाप्त करने के लिए सम्पूर्ण विश्व के उच्च स्तरीय नेता एवं प्रशासक एकजुट होंगे।
मंत्री सूर्य का फल
नृपभयं गदतोपि हि तस्करात्प्रचूर धान्य धनादि महीतले।
रसचयं नहि समर्घतम तदा रविरमात्य पदं हि समागते।
Samvat 2082: इस वर्ष सूर्य के मंत्री होने से प्रजा में राजभय व्याप्त, अनेक प्रकार के रोगों से लोगों में व्याकुलता, प्रजा में चोरी, लूट आदि निंदनीय कार्यों से भय व्याप्त रहेगा। तरल पदार्थों के संग्रह से वृद्धि होगी। धन-धान्यादि की औसत उपज अधिक होगी।
मेघेश सूर्य का फल
जलदये यादि वासरपे तदा सरसिवैरमते जनता रसम् ।
यव चणेक्षुनिवार सुशालिभिः सुखचयं सुलभं भूवि वर्तते ।।
Samvat 2082: इस वर्ष सूर्य के मघेश होने से जौ, चना, दलहन, तिलहन, चावल, सावाँ कोदो आदि की उपज अच्छी होगी। पृथ्वी पर सुख एवं शान्ति की वृद्धि होगी।
धान्येश मंगल का फल
भूमिजे ग्रीष्म धान्येशे ग्रीष्म शालीक्षुघृततैलादिमहर्घाणि भवन्ति च ।
Samvat 2082: इस वर्ष मंगल के धान्येश होने से ग्रीष्म धान्य, चावल, गन्ना, घृत, तैल एवं तरल पदार्थों में तेजी का रुख रहेगा।

रसेश शुक्र का फल
यजन याजन कोत्सुकाः जनपदाजलतोषित मानसः ।
सुखसुभिक्षु ममोदवती धरा धरणिया हतपापगया प्रिया ।।
Samvat 2082: रसेश इस वर्ष शुक्र के रसेश होने से लोगों में सत्प्रवृत्ति की भावना अधिक रहेगी। यज्ञ, याजन तथा अनेक प्रकार के उत्सवों की प्रचुरता होगी। जनता में प्रसन्नता एवं संतोष अधिक रहेगा। देश के शीर्षस्थ नेताओं में विवाद की स्थिति अधिक रहेगी।
सस्येश बृहस्पति का फल
सस्यपतौ त्रिदशगुरौ बहुविधसस्यार्घ सम्पूर्णम्।
द्विज सज्जन पशुवृद्धि कानन फलपुष्प तोय जन्तूनाम्।
Samvat 2082: सस्येश इस वर्ष बृहस्पति के सस्येश होने से प्रजा में सात्त्विक प्रवृत्ति की अधिकता, वैदिक धर्म तथा सनातन धर्म का प्रचार-प्रसार होगा जो जगत के लिए मंगलदायक रहेगा। वर्षा अधिक होगी। अनेक प्रकार के अन्नों से पृथ्वी परिपूर्ण रहेगी।
धनेश सूर्य का फल
कृषक द्रविणपो हियरश्मिसुतो यया विविध कृषिविशेष विशेषितः मानसाः ।
द्विजवराजय यज्ञसुसंयुता संग्रह वस्तु फलार्थदा ।
Samvat 2082: धनेश इस वर्ष सूर्य के धनेश होने से वस्तुओं के संग्रह कर विक्रय से लाभ, विप्रगण योजना कराने में तत्पर रहेंगे अर्थात लोगों में सात्त्विकता की अधिकता रहेगी। कृषि कार्य से अधिक लाभ होगा।
दुर्गेश सूर्य का फल
नय विशेषकरस्तरविस्तदा प्रतभयानरराज पुरोगमा ।
समधिकोन तदा नृपजोन्यजः स्वपव्यजं व्रजतां न भयं क्वचित् ।।
Samvat 2082: दुर्गेश इस वर्ष सूर्य के दुर्गेश होने पर राजनेता सदा न्याय की बातें करेंगे। न्यायपूर्वक कार्य न होने पर जनता निर्भय होकर अपनी-अपनी बातें राजनेता तक रखेंगे। प्रजा तथा न्यायाधीश राजनेताओं का साथ देंगे।
फलेश शनि का फल
यदि शनिः फलपः फलहा भवेज्जनित पुष्पगणस्य दमः सदा।
हिमभयं वर तस्करः जन्तुभिः जनपदो गद राशि महाकुलः ।।
Samvat 2082: इस वर्ष शनि के फलेश होने से फलदायी वृक्षों के पुष्पों का पतन अधिक मात्रा में होगा। जिसके कारण फलों के लिए क्षतिकारक रहेगा। अधिक हिमपात होने से, धन-धान्य की क्षति एवं प्रजा में भय व्याप्त रहेगा। अनेक प्रकार के रोगों से लोग पीड़ित रहेंगे। चोरों का भय व्याप्त रहेगा।
नीरसेश बुध का फल
चित्रवस्त्रादिकं चैव शंख चन्दन पूर्वकम् ।
अर्घवृद्धिः प्रजायेत नीरसेशो बुधो यदि ।।
Samvat 2082: इस वर्ष बुध के नीरसेश होने से छींटदार, धारीदार वस्त्र एवं शंख, चंदन आदि में औसत मंदी रहेगी।
वर्षलग्न एवं जगल्लग्न का सामान्य फल
Samvat 2082: संवत् 2082 के वर्षलग्न सिंह एवं जगल्लग्न मीन हैं। संवत्सर के दशाधिकारियों में छः पाप ग्रह एवं चार शुभ ग्रह हैं। मुख्य पद राजा सूर्य, मंत्री सूर्य एवं दुर्गेश सूर्य है। जगल्लग्नाधिपति बृहस्पति एवं वर्षलग्नाधिपति सूर्य दोनों परस्पर मित्र हैं। दशाधिकारी वर्षलग्न की ग्रह स्थिति एवं जगल्लग्न की ग्रह स्थिति के अनुसार राज्य सरकार एवं केन्द्र सरकार परस्पर मिलकर देश के विकास के लिए कार्य करते रहेंगे।
दशाधिकारियों में अधिक पाप ग्रह हैं अतः केन्द्र सरकार तथा राज्य सरकार के किये गए देश के विकास कार्यों में विपक्षी दल अवरोध उत्पन्न करते रहेंगे। जिससे देश की क्षति एवं देश की प्रजा में असंतोष व्याप्त रहेगा। विपक्षी दल सत्ता प्राप्ति के लिए किसी भी सीमा तक जा सकते हैं। विकसित देशों में सत्ता परिवर्तन होगा। देश के पश्चिम एवं पूर्वोत्तर के राज्यों में सामाजिक एवं जातीय संघर्ष होगा। देश में उच्च स्तरीय शिक्षण संस्थान, चिकित्सालय एवं धार्मिक संस्थानों के निर्माण कार्य होंगे।
युवाओं के रोजगारपरक अनेक कार्य किए जायेंगे। देश की निर्धनता कम करने का प्रयत्न किया जायेगा। देश में महिला सशक्तीकरण हेतु अनेक रोजगारपरक कार्य किये जायेंगे। देश-विदेश की सीमाओं पर तनाव की स्थिति बनी रहेगी। देश-विदेश के शेयर बाजार में तेजी का रुख बना रहेगा। विदेशी मुद्राओं पर समय-समय पर उतार-चढ़ाव की स्थिति रहेगी। देश की आर्थिक स्थिति में मजबूती आयेगी।
देश में कुत्सित राजनैतिक, अराजकता, आतंकी, हिंसक, घटनाएं अधिक एवं बैंकों की स्थिति कमजोर रहेगी। देश में दैवीय प्रकोप होंगे जिससे जन-धन की क्षति होगी। देश के राजनीतिक क्षेत्र में अनेक परिवर्तन देखे जायेंगे। दशाधिकारियों में अधिक पाप ग्रह होने से देश में लूटपाट, भ्रष्टाचार, चोरी आदि में अधिकता देखी जायेगी। देश में औसत शिक्षा-स्वास्थ्य, धार्मिक स्थल के विकास, पर्यटन के क्षेत्र में अधिक कार्य होंगे। रजत, स्वर्ण में तथा इनसे निर्मित वस्तुओं में औसत तेजी रहेगी। पेट्रोल, डीजल एवं तरल पदार्थों में तेजी रहेगी।
सूर्य आर्द्रा नक्षत्र प्रवेश सामान्य फल
Samvat 2082: इस वर्ष आषाढ़ कृष्ण तिथि द्वादशी रविवार भरणी नक्षत्र, सुकर्मा योग, कौलव करण, तुला लग्न, मेषराशि दिवा 14:44 पर सूर्य आर्द्रा में प्रवेश करेगा। आर्द्रा प्रवेश लग्न के ग्रहों की स्थिति के अनुसार वायु के साथ खंडवृष्टि होगी। देश के पश्चिमोत्तर भाग में चक्रवाती प्रकोप अधिक रहेगा। वर्षा की अधिकता रहेगी। देश के पूर्वी भाग में कुछ क्षेत्रों में शुष्कता से फसल की क्षति होगी। देश के पूर्व दक्षिण भाग में वर्षा में न्यूनता रहेगी। तटीय भूभाग में तूफान का प्रकोप रहेगा।
आकाशीय विद्युत, चक्रवात, दैवीय प्रकोप आदि से जन-धन की क्षति होगी। रोग-व्याधि की अधिकता रहेगी। प्रजा में असंतोष रहेगा। देश के उच्च स्तरीय राज्य तथा केन्द्र नेताओं में समय-समय पर युद्ध जैसी स्थिति बनी रहेगी। जो देश के लिए शुभ नहीं रहेगा। चोरी, लूट, अपहरण, बलात्कार जैसी घटनाएँ औसत से अधिक रहेंगी।
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