Thursday, February 12, 2026

2025 का अंत और बिखरती हिन्दू विरासत: दुनिया के अलग-अलग कोनों में एक ही पैर्टन, विदेशों में सुरक्षित नहीं है हिन्दू?

2025 का अंत और बिखरती हिन्दू विरासत: साल 2025 के आख़िरी कुछ महीने दुनिया के लिए सिर्फ़ एक कैलेंडर का अंत नहीं थे, बल्कि उन घटनाओं के भी गवाह थे जिन्होंने वैश्विक स्तर पर हिन्दू और भारतीय समुदाय की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए।

कनाडा से बांग्लादेश तक, और थाईलैंड से कंबोडिया तक की सीमा का भूगोल और सरकारें भले ही अलग हो, लेकिन पीड़ा एक जैसी ही रही है।

विदेशों में रह रहे हिन्दुओं पर हमले, उनके धार्मिक प्रतीकों पर प्रहार और उनकी हत्याएँ, ये सब अब अलग-थलग घटनाएँ नहीं बल्कि वैश्विक स्तर पर हिन्दू और भारतीय पहचान के प्रति बढ़ती असहिष्णुता का संकेत हैं। ये घटनाएँ बताती है कि जब धर्म और पहचान खतरे में हों, तब हर चीख आवाज़ बन जाती है।

कनाडा: जहाँ पढ़ाई के सपने बने मौत की दस्तक

2025 का अंत और बिखरती हिन्दू विरासत: कनाडा, जिसे लंबे समय तक भारतीय छात्रों के लिए सुरक्षित और अवसरों की भूमि माना जाता रहा है,वो साल 2025 के अंत में एक डरावनी सच्चाई से रू-बरू हुआ।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, यूनिवर्सिटी ऑफ टोरंटो के स्कारबरो कैंपस के पास भारतीय छात्र शिवांक अवस्थी की 25 दिसंबर को गोली मारकर हत्या कर दी गई थी।

इसके कुछ ही दिन पहले कनाड़ा में हिन्दू युवती हिमांशी खुराना की उसके लव पार्टनर अब्दुल द्वारा की गयी हत्या ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय को झकझोर दिया था।

कनाडा में हुई ये घटनाएँ सिर्फ़ अपराध नहीं थीं,बल्कि उस भरोसे पर हमला थीं, जिसके सहारे हज़ारों भारतीय परिवार अपने बच्चों को विदेश भेजते हैं। इन घटनाओं ने यह सवाल खड़ा कर दिया कि क्या विदेशों में रह रहे भारतीय छात्र अब सुरक्षित हैं।

आखिर क्यों कॉलेज और यूनिवर्सिटी जैसी सुरक्षित शिक्षण संस्थाओं में ऐसे जानलेवा हमले हो रहे हैं।

ऐसी घटनाये हमें यह सोचने पर मजबूर करती है कि विदेश में शिक्षा की तलाश करने वाले भारतीय छात्रों की सुरक्षा अब चुनौतीपूर्ण होती जा रही है।

बांग्लादेश: हिन्दू अल्पसंख्यकों पर बढ़ती हिंसा

2025 का अंत और बिखरती हिन्दू विरासत: बांग्लादेश में हालात और भी ज़्यादा चिंताजनक नज़र आए।

केवल अफ़वाहों और झूठे आरोपों के आधार पर हिन्दू युवक दीपु चंद्र दास और अमृत मंडल की मज़हबी भीड़ द्वारा हत्या कर दी गई।

इसके अलावा कट्टरपंथियों द्वारा कई हिन्दू मंदिरों और धार्मिक स्थलों पर हमलों की रिपोर्ट्स भी सामने आईं। यह कोई नई कहानी नहीं है।

पिछले कुछ वर्षों से बांग्लादेश में हिन्दू अल्पसंख्यकों पर हमले लगातार बढ़े हैं।

भारत सरकार ने इन घटनाओं पर गहरी चिंता जताते हुए कूटनीतिक स्तर पर सख़्त रुख अपनाने के संकेत दिए, लेकिन सवाल अब भी कायम है, क्या 21वीं सदी में भी किसी समुदाय को अपनी आस्था की कीमत जान देकर चुकानी पड़ेगी?

विशेष रूप से बांग्लादेश में पिछले कुछ सालों से हिन्दू अल्पसंख्यकों और उनके धार्मिक स्थलों पर हमलों की बढ़ती घटनाओं ने यह दिखा दिया है कि अल्पसंख्यकों की सुरक्षा अब भी जोखिम में है, और इसके लिए अंतरराष्ट्रीय जागरूकता की आवश्यकता है।

थाईलैंड: जहाँ बिना खून बहाए आस्था को चोट पहुंचाई गई

थाईलैंड-कंबोडिया सीमा पर सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए कुछ हिन्दू देवी-देवताओं की मूर्तियों को गिरा दिया गया।

भले ही यह सीधी हिंसा न हो, लेकिन धार्मिक प्रतीकों के साथ ऐसा व्यवहार किसी भी समुदाय के लिए गहरी पीड़ा का कारण बनता है।

आस्था केवल पूजा नहीं होती बल्कि वह पहचान होती है, जो इतिहास और अस्तित्व की नींव होती है। जब प्रतीकों को अपमानित किया जाता है, तो संदेश साफ़ होता है कि आपकी पहचान यहाँ असहज है।

वैश्विक परिदृश्य: यह सिर्फ़ घटनाएँ नहीं, एक पैर्टन है

2025 का अंत और बिखरती हिन्दू विरासत: ये घटनाएँ केवल अलग-अलग देशों की घटनाएँ नहीं हैं। यह दर्शाती हैं कि वैश्विक स्तर पर हिन्दू और भारतीय पहचान अभी भी असुरक्षित महसूस कर रही है।

निजी हिंसा हो या सामूहिक भीड़ हिंसा, धार्मिक प्रतीकों का अपमान या नुकसान। सब यह दिखाता है कि दुनिया में अल्पसंख्यकों की सुरक्षा और सम्मान अभी भी चुनौतीपूर्ण है।

ये घटनाएँ यह भी याद दिलाती हैं कि सुरक्षा और सम्मान सिर्फ़ घर या देश तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वैश्विक स्तर पर इसकी रक्षा करना जरूरी है।

अब चुप रहना विकल्प नहीं: जागरूकता, एकजुटता और सतर्कता जरूरी

2025 का अंत और बिखरती हिन्दू विरासत: 2025 के अंत की ये घटनाएँ हमें आईना दिखाती हैं, क्या हम अपनी धर्म, संस्कृति और आस्थाओं की रक्षा के लिए तैयार हैं?

क्या वैश्विक स्तर पर अल्पसंखयक हिन्दू सुरक्षित रह पाएंगे? और क्या दुनिया में अल्पसंख्यकों के अधिकारों और सम्मान को समान महत्व दिया जाएगा?

यह सिर्फ हिन्दुओं या भारतीयों का मामला नहीं है, यह सभी धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान रखने वाले लोगों के लिए चेतावनी है।

हर हमला, हर टूटी मूर्ति, हर बुझता जीवन हमें चेतावनी देता है कि असहिष्णुता को अनदेखा करने की कीमत बहुत भारी होती है।

यह सिर्फ़ खबर नहीं, सतर्कता की पुकार है। साल 2025 की ये घटनाएँ इतिहास के पन्नों में सिर्फ़ समाचार बनकर नहीं रहनी चाहिए।

ये हमें याद दिलाती हैं कि सुरक्षा, सम्मान और आस्था की रक्षा अब वैश्विक चुनौती बन चुकी है। अगर आज आवाज़ नहीं उठी, अगर आज जागरूकता नहीं आई, तो कल यह चीख और भी तेज़ होगी।

अब समय है जागरूक होने का सचेत रहने का और सबसे ज़रूरी एकजुट होने का।

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Karnika Pandey
Karnika Pandeyhttps://reportbharathindi.com/
“This is Karnika Pandey, a Senior Journalist with over 3 years of experience in the media industry. She covers politics, lifestyle, entertainment, and compelling life stories with clarity and depth. Known for sharp analysis and impactful storytelling, she brings credibility, balance, and a strong editorial voice to every piece she writes.”
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