गुजरात: गुजरात के नर्मदा जिले के देदियापाड़ा में हाल ही में एक ऐतिहासिक और गौरवपूर्ण कार्यक्रम का आयोजन हुआ।
जिसमें 150 से अधिक आदिवासी (ST) परिवारों ने स्वेच्छा से ईसाइयत को त्यागकर सनातन हिंदू धर्म अपनाया।
ईसाई धर्म को छोड़ा
गुजरात: नर्मदा जिले के हिंदू संगठनों और संतों द्वारा आयोजित एक विशेष ‘घर वापसी’ कार्यक्रम में जनजातीय लोग ईसाई धर्म छोड़कर सनातन हिंदू धर्म में लौट आए।
ये सभी जनजातीय लोग पहले ईसाई धर्म अपना चुके थे, लेकिन अब स्वेच्छा से हिंदू धर्म की औपचारिक विधियों के साथ वापसी कर ली है।
यह आयोजन स्थानीय समुदाय के लिए एक प्रेरणादायक और गौरवपूर्ण क्षण साबित हुआ।
मंत्रोच्चारण और परिवार का स्वागत
गुजरात: कार्यक्रम में परिवारों के स्वागत के लिए विशेष पूजा-अर्चना, वेद मंत्रों का उच्चारण और सांस्कृतिक प्रस्तुतियां आयोजित की गईं।
बच्चों और युवाओं को भी संस्कार और धर्म के महत्व के बारे में जानकारी दी गई, ताकि वे अपनी सांस्कृतिक और धार्मिक पहचान के प्रति जागरूक हों।
पूर्वजों की परंपरा को अपनाना
गुजरात: कार्यक्रम में शामिल परिवारों ने साझा किया कि उनका निर्णय पूर्वजों की परंपराओं और सांस्कृतिक मूल्यों को पुनः अपनाने की इच्छा से प्रेरित था।
उन्होंने कहा कि यह कदम उनकी धार्मिक स्वतंत्रता और आत्म-साक्षात्कार का प्रतीक है।
धर्म परिवर्तन नहीं, पुनर्जीवन का आयोजन
गुजरात: स्थानीय धार्मिक और सामाजिक संगठनों ने इस कार्यक्रम का आयोजन कर इसे और भव्य बनाया।
उन्होंने परिवारों को उनके निर्णय के लिए आशीर्वाद दिया और आगे के लिए मार्गदर्शन प्रदान किया।
यह आयोजन केवल धर्म परिवर्तन नहीं, बल्कि सांस्कृतिक पुनर्जीवन और सामाजिक चेतना का प्रतीक भी माना गया।
समाज को मजबूत बनाना
गुजरात: गुजरात के देदियापाड़ा में आयोजित यह कार्यक्रम धार्मिक स्वतंत्रता, सांस्कृतिक जागरूकता और सामाजिक एकता का प्रतीक है।
यह कार्यक्रम समाज के लिए यह संदेश देता है कि हर व्यक्ति अपनी धार्मिक पहचान चुनने और अपनाने में स्वतंत्र है।
साथ ही अपने सांस्कृतिक मूल्यों को संरक्षित करने का अधिकार भी हर किसी को प्राप्त है।
इस ऐतिहासिक अवसर ने यह भी स्पष्ट किया कि धार्मिक चेतना और सांस्कृतिक समर्पण समाज को जोड़ने और मजबूत बनाने का माध्यम हो सकते हैं।
युवाओं और बच्चों में जागरूकता
गुजरात: इस भव्य आयोजन ने न केवल वर्तमान पीढ़ी को प्रेरित किया, बल्कि आने वाली पीढ़ी में संस्कार, धार्मिक चेतना और सांस्कृतिक जागरूकता का बीज भी बोया।
ऐसे कार्यक्रम समाज को जोड़ते हैं और धार्मिक व सांस्कृतिक मूल्यों की रक्षा सुनिश्चित करते हैं।
गुजरात में 150 से अधिक परिवारों की स्वेच्छा से घर वापसी ने यह संदेश दिया कि भारतीय समाज में धर्म और संस्कृति का सम्मान, व्यक्ति की आस्था और पहचान के साथ गहराई से जुड़ा हुआ है।

