कौथोलिक चर्च के 266वें पोप फ्रांसिस गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती है। 80 साल की उम्र में निमोनिया से जूझ रहे पोप के ठीक होने के लिए लोग दुनियाभर प्रार्थनाएं कर रहे हैं।
पोप की बिगड़ती तबियत को देखते हुए अब लोगों को उनकी विरासत की चिंता है। ऐसे में क्या आपको पता है कि पोप जो ईसाईयों के सर्वोच्च धर्मगुरु होते हैं, उनका चुनाव आखिर होता कैसे है? आइये आपको बताते हैं।
नए पोप के चुनाव से पहले पुराने पोप को औपचारिक रूप से अपना इस्तीफ़ा देना होता है। इस इस्तीफे में कारण और तारिख स्पष्ट रूप से बतानी होती है।
कैनन लॉ के मुताबिक इस्तीफा स्वतंत्र और स्वेच्छा से ही दिया जाना चाहिए। इस्तीफे के बाद ही पोप का पद खाली माना जाता है।
इस इस्तीफे के बाद कार्डिनल्स की मीटिंग होती है। और यहीं पर नए पोप का चुनाव किया जाता है।
ये कार्डिनल्स कैथोलिक चर्च के हाई रैंक पादरी होते हैं, जो चर्च के प्रशासन में सबसे अहम भूमिका निभाते हैं। इनकी ये मीटिंग वेटिकन सिटी के सिस्टीन चैपल में होती है।
इस बैठक के बाद वो भरी और चर्च की दुनिया से अलग हो जाते हैं। फिर सिस्टीन चैपल में वो नए पोप के लिए मतदान करते हैं।
इस दौरान कार्डिनल दो के ग्रुप के में मतदान करते हैं। हर कार्डिनल एक पत्र में अपने पसंद से नाम लिखता है। इसके बाद जिस नाम के पास दो तिहाई बहुमत है उसे पोप की उपाधि मिल जाती है।
वेटिकन सिटी के पोप कैथोलिक चर्च के सर्वोच्च पादरी और वेटिकन सिटी के राज्य प्रमुख होते हैं। ये पद कैथोलिक के चर्च का सबसे सर्वोच्च पद है।
ये चर्च की नीतियों को शिक्षाओं को निर्धारिक करने में में अहम भूमिका निभाते हैं। इन्हें धर्मगुरु भी कहा जाता है।