बांग्लादेश में अल्पसंख्यक हिंदू समुदाय को निशाना बनाकर ईशनिंदा के झूठे आरोपों के जरिए हमले लगातार बढ़ते जा रहे हैं। हाल में दीपू चंद्र दास की बेरहमी से हत्या ने एक बार फिर इस गंभीर समस्या को सामने ला दिया है।

कट्टरपंथी भीड़ ने दीपू चंद्र दास पर कथित तौर पर ईशनिंदा का आरोप लगाया गया और पीट-पीटकर उनकी हत्या कर दी। यही नहीं दीपू को पेड़ से बांधकर जिंदा जला दिया गया।

दीपू चंद्र दास की हत्या

बांग्लादेश के लक्ष्मीपुर में उपद्रवियों ने एक घर को बाहर से बंद कर पेट्रोल डालकर आग लगा दी। आग में जिंदा जलने से एक 7 साल की बच्ची की मौत हो गई, जबकि तीन लोग गंभीर रूप से झुलस गए।

7 साल की बच्ची को जिंदा जलाया

 बांग्लादेश की आज़ादी की लड़ाई में योगदान देने वाले एक बुज़ुर्ग हिंदू दंपति जोगेश चंद्र रॉय और सुबर्णा रॉय की बेरहमी से गला रेतकर हत्या कर दी गई। 

हिंदू दंपति की हत्या

दीपु चंद्र दास की हत्या के बाद मजहबी भीड़ ने अमृत मंडल की पीट-पीटकर निर्मम हत्या कर दी। ऐसा आरोप लगाया गया था कि उन्होंने फेसबुक पर आपत्तिजनक पोस्ट साझा की है। बाद में पता चला कि अकाउंट हैक हो सकता है, लेकिन तब तक भीड़ उन्हें पीट-पीटकर मार चुकी थी।

अमृत मंडल की हत्या

बांग्लादेश के हबिगंज जिले में 27 दिसंबर 2025 की सुबह 18 वर्षीय कामदेव दास का शव निकटवर्ती तालाब में तैरता हुआ पाया गया, उसके गले पर ऊंगलियों के निशान मौजूद थे। परिजनों ने आरोप लगाया कि मजहबियों ने उसकी गला दबाकर हत्या कर दी।

कामदेव दास की हत्या

पलाश कांति साहा को हमलावरों ने उन्हें घर के अंदर बंद किया और बाहर से आग लगा दी। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक हमलावर खुलेआम कह रहे थे कि वे हिंदुओं को निशाना बना रहे हैं। 

पलाश कांति को जिंदा जलाया